Saturday, January 7, 2012

आंकड़ों की बाजीगरी : सीपी बोले, क्राइम हुआ कम

दिल्ली पुलिस आयुक्त ने एक बार फिर आंकड़ों की बाजीगरी दिखाकर यह दर्शाने का प्रयास किया कि बीते साल राजधानी में अपराध कम हुए हैं। अपने इस दावे को पुख्ता करने के लिए पुलिस आयुक्त बीके गुप्ता ने जनसंख्या के अनुपात में हुए अपराध के आंकड़े पर ज्यादा जोर दिया है। उनका दावा है कि पिछले 13 वर्षो के मुकाबले साल 2011 में न सिर्फ जघन्य अपराधों में बल्कि कुल आईपीसी के मामलों में भी खासी कमी आई है। दिल्ली पुलिस आयुक्त बीके गुप्ता ने बताया कि साल 2011 में जिन आपराधिक मामलों में कमी आई है, इनमें हत्या व लूट के मामले शामिल हैं। उन्होंने बताया कि साल 2010 में हत्या के करीब 565 मामले सामने आए थे लेकिन बीते साल यह संख्या घटकर 543 हो गई है, इसी तरह लूट के मामलों में 599 के मुकाबले बीते साल सिर्फ 562 घटनाएं हुई। पुलिस आयुक्त ने बताया कि हत्या में करीब 3.89 प्रतिशत की कमी आई जबकि लूट के मामलों में 6.18 प्रतिशत की कमी हुई। इसी तरह झपटमारी के मामले में साल 2010 के 1671 केस के मुकाबले बीते साल 1476 घटनाएं हुईं, हालांकि कुछ ऐसे भी मामले रहे जिनमें साल 2010 के मुकाबले बढ़ोतरी दर्ज की गई। इनमें डकैती, हत्या का प्रयास, फिरौती के लिए अपहरण व दुष्कर्म आदि के मामले शामिल हैं। इस साल डकैती के मामलों में लगभग 3.13 प्रतिशत, हत्या के प्रयास में 24.12 प्रतिशत, दुष्कर्म में 12.03 प्रतिशत व फिरौती के लिए अपहरण में 38.89 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। पुलिस आयुक्त बी.के गुप्ता ने बताया कि उन्होंने दिल्ली पुलिस की कमान संभालते ही यह ऐलान किया था कि स्ट्रीट क्राइम तथा बुजुगरे व महिलाओं पर होने वाले अपराध पर हर हाल में अंकुश लगाना है। इसी क्रम में कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने तमाम उन लोगों की लगाम कसी, जो आए दिन झपटमारी, लूटपाट, लड़ाई, झगड़े जैसे आपराधिक मामलों में लिप्त रहते हैं। इसके अलावा इलाके के घोषित बदमाशों व भगोड़ों पर भी नजर रखी, जिसका नतीजा यह रहा कि लूट के साथ-साथ झपटमारी के मामलों में भी खासी कमी आई। उन्होंने बताया कि साल 2010 के मुकाबले 2011 में झपटमारी के मामलों में लगभग 11.67 प्रतिशत की कमी आई है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि राजधानी में जघन्य अपराध के मामले कुछ अवश्य बढ़े हैं, लेकिन कुछ मामलों को छोड़ कर अधिकांश जघन्य मामलों को सुलझाने में दिल्ली पुलिस को सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि साल 2010 के मुकाबले बीते साल कुल आईपीसी के 46 प्रतिशत के मुकाबले 54 प्रतिशत मामले सुलझा लिए गए जबकि जघन्य मामलों में यह आंकड़ा 87 के मुकाबले करीब 92 प्रतिशत का है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि नए साल में आतंक के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा। साथ ही महिलाओं तथा बुजुगरें के प्रति होने वाले क्राइम और सड़कों पर होने वाले अपराध की रोकथाम की हरसंभव कोशिश की जाएगी। इसके अलावा यातायात और थानों के मॉनिटरिंग पर भी जोर रहेगा। पुलिस आयुक्त ने अधीनस्थों को हिदायत दी कि थाने में शिकायत लेकर आने वालों के साथ सही ढंग से पेश आएं। उन्हें इस बात की शिकायत अक्सर मिलती रहती है कि थानों में पुलिसकर्मी समस्या लेकर आने वाले आम लोगों को तरह-तरह के बहाने बनाकर टरका देते हैं जिससे आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।