हिमाचल प्रदेश में भांग उगाने पर रोक और चरस तस्करी पर नकेल कसने के लिए अब पंचायत प्रधानों पर दबाव बनाया जाएगा। चंबा जिला प्रशासन ने यह अनूठा कदम उठाया है। जिला प्रशासन ने प्रधानों को चेताया है कि अगर उनके क्षेत्र में भांग की खेती होती है तो उनकी कुर्सी भी जा सकती है। प्रशासन ने प्रधानों से कहा है कि वह इस बारे में कोई भी जानकारी मिले तो तुरंत जिला प्रशासन को सूचित करें। प्रशासन को उम्मीद है कि यह कदम भांग उगाने और चरस तस्करी को रोकने में कारगर साबित होगा। प्रशासनिक आदेश में कहा गया है कि अब चरस तस्करों के साथ उन पंचायत प्रतिनिधियों पर भी कार्रवाई होगी, जिनके वार्ड या गांव में भांग की खेती की जा रही है। पंचायत में भांग की खेती के लिए सीधे तौर पर प्रधान को उत्तरदायी माना जाएगा। शुरुआती पड़ताल में पंचायत प्रतिनिधि से इस संबंध में पूछताछ की जाएगी व इसके बाद भी भांग की खेती को नष्ट करने का कोई प्रावधान न किया गया तो पंचायत प्रधान पर गाज गिरेगी। चंबा जिला के चुराह उपमंडल में भांग की सबसे अधिक पैदावार होती है। अब तक पकड़े गए ज्यादातर चरस तस्कर यहीं से ताल्लुक रखते हैं। प्रशासन ने पुलिस की मदद से हाल ही में इस इलाके में भांग उखाड़ो अभियान चलाया था, लेकिन उसके सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आ पाए हैं। ऐसे में अब प्रशासन ने अब पंचायतों को भांग की खेती नष्ट करने की जिम्मेदारी सौंपी है। यह फार्मूला सफल रहा तो समूचे चुराह उपमंडल में प्रशासनिक कार्रवाई के खौफ से भांग की खेती खत्म हो सकती है। चंबा के उपायुक्त देवेश कुमार इस संबंध में झज्जाकोठी में हुए जनता के द्वार कार्यक्रम के दौरान भी पंचायत प्रतिनिधियों को भांग की खेती से दूर रहने की हिदायत दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक टीम निरीक्षण करेगी और आदेश की अवहेलना होने पर पंचायत प्रतिनिधियों पर कार्रवाई भी हो सकती है। नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं : चंबा के उपायुक्त देवेश कुमार का कहना है कि पंचायत में भांग के पौधे मिलने पर पंचायत प्रधान से जवाब-तलब किया की जाएगी। अगर समय रहते इन पौधों को हटाया नहीं गया या नियमों की अनदेखी हुई तो प्रधान पर सीधी कार्रवाई भी की जा सकती है।
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