गुट बनाकर सीमेंट के दाम बढ़ाना कंपनियों को महंगा पड़ा है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआइ) ने आपस में मिलकर सीमेंट के दाम बढ़ाने पर एसीसी, अल्ट्राटेक, अंबुजा और जयप्रकाश एसोसिएट्स समेत 11 बड़ी सीमेंट कंपनियों पर 6,307 करोड़ का भारी जुर्माना कर दिया है। देश में अपनी तरह का यह पहला फैसला है। आयोग का यह निर्णय बिल्डरों की शिकायत पर हुई जांच के बाद आया है। सीमेंट कंपनियों की ओर से अगस्त, 2010 के बाद बढ़ाई गई कीमतें प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच का आधार बनी हैं। इसलिए सीसीआइ ने इन कंपनियों के वर्ष 2009-10 और 2010-11 में हुए मुनाफे का 50 प्रतिशत हिस्सा अर्थदंड के तौर पर तय किया है। इसके तहत सबसे ज्यादा जुर्माना जयप्रकाश एसोसिएट्स को 1,323.6 करोड़ रुपये देना होगा। कंपनियों के अलावा सीमेंट मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन पर भी 73 लाख रुपये जुर्माना हुआ है। सभी कंपनियों और एसोसिएशन को 90 दिन के भीतर जुर्माने की राशि जमा करनी होगी। यह रकम संभवत: केंद्र सरकार की समेकित निधि में जाएगी। आयोग की तरफ से महानिदेशक जांच ने इस शिकायत की तफ्तीश की थी। जुलाई, 2011 में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन गंभीर अपराध जांच विभाग (एसआइएफओ) ने भी एसीसी, अंबुजा और अल्ट्राटेक के खिलाफ जांच की थी। सीसीआइ ने अपने 258 पेज के फैसले में कहा है कि कंपनियों के तौर तरीके से यह साबित हो गया है कि उन्होंने सीमेंट के दाम बढ़ाने के लिए कार्टेल (गुट) बनाया। इन कंपनियों ने देश में सीमेंट के उत्पादन और कीमतों को नियंत्रित व सीमित करने की दिशा में मिलकर काम किया। सीसीआइ ने माना है कि सीमेंट कंपनियों ने प्रतिस्पर्धा कानून 2002 के नियमों का उल्लंघन किया। इन नियमों के मुताबिक कार्टेल साबित होने की सूरत में कंपनियों पर उनके मुनाफे का 300 प्रतिशत तक जुर्माना किया जा सकता है। सीमेंट कंपनियों ने आयोग के इस आदेश पर चुप्पी साध ली है। कंपनियों के बयान के मुताबिक, वे आयोग के आदेश का अध्ययन करने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगी।
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