गुड़गांव सिटी बैंक घोटाले के मास्टर माइंड शिवराज पुरी (34) व पुलिस के बीच चल रही भागमभाग गुरुवार को थम गई। तीन दिन से फरार चल रहा बैंक मैनेजर गुरुवार दोपहर को नाटकीय अंदाज में जिला अदालत आया और ड्यूटी मजिस्ट्रेट आरके यादव की अदालत में सरेंडर कर दिया। इसकी भनक पुलिस को थी। पुलिस अधिकारी वहां डटे भी थे, पर उसे अदालत परिसर में आने से पहले गिरफ्तार नहीं किया गया। पेशी होते ही थाना डीएलएफ फेज-टू थाना पुलिस ने दस दिन की रिमांड मांगी, पर अदालत ने सात दिन की रिमांड दे पुलिस के हवाले कर दिया। सिटी बैंक के सहायक उपाध्यक्ष बीनू सोमन ने थाना डीएलएफ फेज टू में मामला दर्ज कराया था। इसमें आरोप लगाया कि स्क्वायर बिल्डिंग में खुली सिटी बैंक की कारपोरेट शाखा में तैनात रहे मैनेजर (रिलेशनशिप) शिवराज पुरी ने सेबी का फर्जी पत्र तैयार कर निवेशकों को धोखे में रख करोड़ों की रकम हड़प ली। बकौल पुलिस आयुक्त एसएस देसवाल इस नटवर लाल के विश्र्वास में आकर सितंबर, 2009 में भारी ब्याज के लालच में कई कारपोरेट कंपनियों ने करीब 200 करोड़ रुपये की रकम जमा कर दी। करीब सौ करोड़ की रकम रईस लोगों ने व्यक्तिगत रूप से निवेश की थी। पुलिस आयुक्त ने बताया कि शिवराज ने विश्र्वास में ले करीब चालीस निवेशकों को 5011666247 नंबर का खाता बैंक का बताया, जबकि यह खात उसने नाना प्रेमनाथ(80) के नाम पर खोल रखा था। इस खाते में सबसे अधिक राशि हीरो गु्रप एसोसिएट्स नामक कंपनी की लगी है। रैलीगियर व ओकाया जैसी कंपनियों ने भी पैसे लगाए हैं। एक खाता उसने नाना प्रेमनाथ, नानी शीला और मां दीक्षा पुरी का संयुक्त रूप से खुलवा रखा था। इस खाते में कथित निवेश का धन जमा होने पर अन्य खातों में ट्रांसफर कर देता था। उन्होंने बताया कि शिवराज पुरी के पिता की ब्रोकरेज कंपनी मार्टीग के माध्यम से भी पैसे निवेश किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच विशेषज्ञों की टीम को सौंपी गई है, जिसमें 40 पुलिस अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि घोटाले की रकम जिस खाते में गई और उससे जिसका भी लेन देन हुआ हैं, सभी खातों का सील करा जांच के दायरे में लिया जाएगा। अब तक 120 खाते सील किए जा चुके हैं। डेढ़ दर्जन खातों मे जमा 3 करोड़ 85 लाख की रकम भी पुलिस सीज करा चुकी है। पुलिस ने अन्य खातों में जमा रकम को पता लगाने के लिए दो टीमें लगाई हैं। खाकी से खौफजदा : पुलिस रिमांड के दौरान शिवराज अपने वकील से रोजाना थाने में अकेले में 15 मिनट बातचीत कर सकेगा। आरोपी ने वकील सरताज बासवाना के जरिए अदालत से अनुरोध किया तो अदालत ने यह समय दिया है। उसने अदालत के सामने आशंका जताई कि उसे पुलिस रिमांड पर पीटा जा सकता है। इसके जवाब में अदालत ने कहा कि आपके वकील को इसीलिए मिलने का समय दिया गया है। कुरेदने पर मुस्करा देता था : फर्जीवाड़े से पहले बैंक अधिकारियों का लाडला रहा शिवराज अदालत में दो घंटे तक रहा, पर चुप्पी नहीं तोड़ी। अदालत से बाहर आते वक्त जब मीडिया कर्मी उससे सवाल करते तो वह नो कमेंट्स कह मुस्करा देता था। उसके वकील सरताज बासवाना ने कहा कि सारा खेल बैंक के कुछ उच्चाधिकारियों की जानकारी में था। सिटी बैंक के वकील हरीश मल्होत्रा ने कहा कि फर्जीवाड़ा आरोपी ने अपने स्तर पर ही किया। पुलिस जांच में बैंक हर तरह से सहयोग कर रही है। डीसीपी (ईस्ट) विकास अरोड़ा के नेतृत्व में पुलिस टीम शिवराज से पूछताछ कर रही थी।
Friday, December 31, 2010
Thursday, December 30, 2010
3.34 अरब की कर चोरी पकड़ी
गुटखा कंपनियों पर सेल टैक्स का छापा
लखनऊ। वाणिज्य कर विभाग ने बुधवार को लखनऊ, मथुरा, नोएडा तथा गाजियाबाद में ताबड़तोड़ छापे मारकर अरबों रुपये की कर चोरी पकड़ी है। प्रारंभिक रूप से किए गए आकलन में करीब एक अरब रुपये की कर चोरी प्रकाश में आई है। विभाग ने वित्तीय वर्ष 2010-11 के नौ माह में 19 अरब 45 करोड़ रुपये का नियम विरुद्ध टर्न ओवर पकड़ा है, इसमें 3 अरब 34 करोड़ रुपये का टैक्स बनता है। सरकार ने माना है कि प्रदेश में व्यापारी व्यापक पैमाने पर कर चोरी कर रहे हैं। तीन वर्षों का आकलन किया जाए तो चोरी 1000 करोड़ रुपये तक हो सकती है।
वाणिज्य कर विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि पान मसाला निर्माण एवं बिक्री में लगी इन फर्मों के तीन वर्षों के कारोबार की जांच कराई जा रही है। विभाग ने गत महीने कानपुर में सुपाड़ी के गोदाम पर छापा मारकर 10 करोड़ रुपये की सुपाड़ी पकड़ी थी। इस छापेमारी के बाद विभाग ने पान मसाला कंपनियों पर छापा मारने का निर्णय किया। इसके आधार पर लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद और मथुरा के प्रसिद्ध पान मसाला कंपनियों पर एकसाथ छापेमारी की गई।
दिल्ली से औसतन रोजाना चार बच्चे गायब
नई दिल्ली राजधानी में लगभग रोज चार बच्चे लापता हो रहे हैं। दूसरी ओर एक बच्चा रोज लावारिस हालत में सड़क पर मिलता है। पुलिस का कहना है कि लापता बच्चों में से 75 फीसदी लौट आते हैं और लावारिस को अनाथालय भेज दिया जाता है। मगर लापता 25 फीसदी एवं लावारिस बच्चों के बचपन का क्या? आखिर कहां गए बाल अधिकार संरक्षण के दावे? लापता बच्चों के लिए काम करने वाली नवसृष्टि संगठन की सेक्रेट्री रीना बनर्जी का कहना है कि आंकड़ा कहीं अधिक है, मगर पुलिस के डर से लोग चुप बैठ जाते हैं। मजदूरी करने वाले पलायन कर जाते हैं। बच्चे देश का भविष्य हैं। लापता बच्चों के गलत हाथों में पड़ने की सर्वाधिक संभावना रहती है। जाहिर है कि ऐसे में उनका बचपन बर्बाद होगा। यह चिंता का विषय है। देश में हर साल औसतन 44 हजार बच्चे गुम होते हैं। इनमें सर्वाधिक 6.7 फीसदी दिल्ली के होते हैं। यदि बच्चों का वर्तमान ही बिगड़ गया तो उनके भविष्य की बात बेमानी हो जाती है। पुलिस कहती है अधिकतर बच्चे नाराज होकर, पढ़ाई से जी चुराकर या फिल्मों से प्रेरित होकर मुंबई भाग जाते हैं। इस साल (जनवरी से नवंबर तक) राजधानी में करीब 4500 बच्चों के लापता होने के मामले हुए, जिनमें से 3300 घर लौट आए। अब निठारी कांड के बाद गठित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सदस्य पीसी शर्मा की अध्यक्षता वाली कमेटी के बयान पर गौर फरमाएं। लापता होने वाले बच्चे या तो रंजिश की वजह से मार दिए जाते हैं या उनका उपयोग खतरनाक औद्योगिक इकाइयों समेत घरों में सस्ते बंधुआ श्रमिक, बाल वेश्यावृति, चाइल्ड पोर्न, भीख मंगवाने, गोद लेने, जबरन शादी या मानव अंग तस्करी में किया जाता है। यह और बात है कि कमेटी के महत्वपूर्ण सुझावों पर आज तक किसी ने अमल नहीं फरमाया। रीना बनर्जी कहती हैं कि पुलिसिया आंकड़े झूठ का पुलिंदा हैं। गरीब तबके की शिकायत दर्ज नहीं होती। आमतौर ठेकेदार के यहां काम करने वाले बच्चा लापता होने की शिकायत लेकर थाने जाते हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती। कुछ दिन लाडले की राह तकने के बाद ऐसे परिवार पलायन कर जाते हैं।
बाल अपराध में चौथा स्थान
महिलाएं ही नहीं, दिल्ली में बच्चे भी सुरक्षित नहीं है। महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध को लेकर कई बार चिंता जताई गई, बच्चों के प्रति हो रहे अपराधों की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। देश की जनसंख्या का मात्र डेढ़ प्रतिशत होने के बावजूद बच्चों के प्रति हुए अपराध में दिल्ली की भागीदारी 8.2 प्रतिशत है। इसका खुलासा राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो(एनसीआरबी) के आंकडों से हुआ है। हत्या, दुष्कर्म, बाल विवाह, अपहरण सहित बच्चों के प्रति हुए अन्य अपराधों को लेकर वर्ष 2008 में देशभर में 22500 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से 8.2 प्रतिशत मामले केवल दिल्ली में दर्ज हुए थे। देशभर के आंकडों में मध्यप्रदेश ने प्रथम स्थान पाया और दूसरे स्थान पर यूपी व तीसरे स्थान पर महाराष्ट्र राज्य है। जनसंख्या के एक छोटे से हिस्से वाला शहर दिल्ली अपराध के मामले में चौथे स्थान पर रहा। बच्चों के प्रति होने वाले अपराध में सबसे ज्यादा अपहरण (34 प्रतिशत) के मामले सामने आए है। अपहरण के मामलों में यूपी के बाद दूसरे स्थान पर दिल्ली रहा है। उल्लेखनीय है कि एनसीआरबी के अनुसार वर्ष 2008 में महिलाओं के प्रति हुए अपराध में देश के 35 मेगा सिटी में दिल्ली पहले नंबर पर थी। बच्चों के प्रति हुए अपराध में दिल्ली की तुलना देश के राज्यों से हुई है और उसमें वह चौथे स्थान पर है।
Thursday, December 23, 2010
सुरेंद्र कोली को खुला छोड़ना समाज के लिए खतरा
न्यायाधीश डा. एके सिंह ने सजा सुनाते हुए कहा कि अभियुक्त सुरेंद्र कोली ने एक निरीह बालिका दीपाली, जिसकी उम्र करीब 12-13 साल थी, की बलात्कार के प्रयास के दौरान बर्बरता से हत्या करके उसके शव को क्षत विक्षत किया। अभियुक्त के परिवार में उसकी विधवा मां, सात वर्ष की पुत्री, तीन वर्ष का पुत्र और पत्नी है। जिनमें से कोई भी अभियुक्त से मिलने न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। इससे पता चलता है कि इस बर्बर अपराध की वजह से समाज की तरह परिवार ने भी उससे कोई संबंध नहीं रखा है। रोंगटे खड़े कर देने वाले इस अपराध के लिए सहानुभूति की कोई बात करना कानून तथा अमन की बुनियाद हिलाने के समान है। इस घिनौने अपराध को अनेक बार करना अभियुक्त सुरेंद्र कोली ने स्वीकार किया है, जो इस तथ्य का प्रबल संकेत है कि इस अपराधी में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है। ऐसे अपराधी को खुला छोड़ना समाज के लिए खतरा है। अत: विरलतम अपराध के इस मामले में मृत्यु दंड से कम सजा हो ही नहीं सकती।
वकीलों के बीच हुई जिरह
दीपाली मर्डर केस के क्राइम संख्या 1022-2006 में कोर्ट में कोली के वकील प्रकाश चंद्र ने कहा कि सुरेंद्र कोली गरीब है। उसकी विधवा मां, पत्नी और दो बच्चे हैं। घर में कोई कमाने वाला नहीं है। इसलिए उसे कम से कम सजा सुनाई जाए। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बहस करते हुए कहा कि कोली का अपराध विरलतम अपराध का गंभीर मामला है। जघन्य अपराध के बाद उसका परिवार नाता तोड़ चुका है।
कोली की आंखों में आंसू
देश के बहुचर्चित निठारी कांड में रिंपा हलधर, आरती, रचना मर्डर केस में फैसले के बाद आज दीपाली मर्डर केस में सीबीआई की विशेष कोर्ट में सुनवाई थी। अभियुक्त सुरेंद्र कोली को पुलिस कड़ी सुरक्षा में लेकर कोर्ट पहुंची। सजा की बात जेहन में आते ही कोली की आंखें कई बार नम हुई। कोर्ट में कोली ने कहा कि उसे सीबीआई ने फंसाया है, वह तो मोनिंदर सिंह पंधेर के यहां मात्र दो हजार रुपये पर नौकर था और खाना बनाता था। वहां कालगर्ल आती थी। जज ने पूछा कि कब से नौकरी पर थे। कोली बोला कि 24 जुलाई 2005 से। न्यायाधीश ने सुरेंद्र कोली को दोषी साबित करते हुए एक घंटे बाद सजा सुनाने को कहा। करीब 12:45 बजे कोर्ट ने कोली को सजा-ए-मौत का फैसला सुनाया तो कोली की आंखें छलछला गई। उसने कोर्ट के फैसले पर कांपते हाथों से दस्तखत किए। वकील इस दौरान न आए तो कोली ने कहा कि अब जेल में वे खुद सजा के फैसले की कॉपी लेकर जाएगा। कोली के परिजन फैसले के दौरान कहीं नजर नहीं आए।
छोटी पायल मर्डर केस में सुनवाई अंतिम चरण में
निठारी कांड के चार मर्डर केस में सुरेंद्र कोली को सीबीआई की विशेष कोर्ट द्वारा फांसी की सजा सुना दी गई है। इसके बाद छोटी पायल मर्डर केस में जोरों पर सुनवाई चल रही है। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया कि छोटी पायल मर्डर केस में साक्ष्य पूर्ण हो चुके हैं। केस में सुनवाई अंतिम चरण में है। इस मामले में 13 जनवरी को सीबीआई की विशेष कोर्ट में सुनवाई होनी है।
कब मिलेगी बच्चों के कातिलों को फांसी
नोएडा। निठारी कांड में दर्ज मुकदमों में तीसरा फैसला भी आ गया, लेकिन इस बार भी निठारी के पीड़ितों का एक ही सवाल था कि आखिरी किस दिन फांसी पर लटके दिखेंगे खूनी कोठी में कत्ल करने वाले बच्चों के कातिल। दीपाली हत्याकांड में नौकर सुरेन्द्र कोली को फांसी की सजा सुनाए जाने की खबर मिलते ही निठारी कांड के पीड़ित परिजनों ने मांग कि सुरेन्द्र को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाया जाए। दीपाली का परिवार अब निठारी छोड़ कर कहीं और चला गया है, लेकिन बाकी पीड़ित सुरेन्द्र को फांसी की सजा सुनाए जाने पर खुश हैं तो कोठी मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर को इस मामले में चार्जशीट न करने का अफसोस है। इसके लिए उन्होंने सीबीआई की जांच टीम को जिम्मेदार ठहराया। इससे पहले रचना हत्याकांड में सुरेन्द्र को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है।
कोर्ट परिसर में कब क्या हुआ
सुरेंद्र कोली को कोर्ट में पेश किया गया10:30 बजे
कोर्ट में बचाव और अभियोजन में बहस11:35 बजे
बहस केबाद कोली को दोषी साबित11:45 बजे
कोर्ट में कोली को सजा सुनाई गई-दोपहर12:45 बजे
कोली के फैसले पर हस्ताक्षर और कॉपी दी1:05 बजे
कोली को पुलिस जेल ले गई- दोपहर1:10 बजे
रिंपा मर्डर केस-13 फरवरी 2009 फांसी की सजा
आरती मर्डर केस-12 मई 2010 फांसी की सजा
रचना मर्डर केस-28 सितंबर 2010 फांसी की सजा
दीपाली मर्डर केस-22 दिसंबर 2010 फांसी की सजा
दीपाली हत्याकांड केस हिस्ट्री
दीपाली गायब हुई थी18 जुलाई 2006
गुमशदगी दर्ज कराई19 जुलाई 2006
सुरेन्द्र कोली गिरफ्तार29 दिसंबर 2006
दीपाली मर्डर केस सेपरेट30 दिसंबर 2006
कोली का नार्को टेस्ट22 जनवरी 2007
केस सीबीआई को मिला11 जनवरी 2007
सुरेन्द्र कोली दोषी करार22 दिसंबर 2010
सुरेंद्र कोली को सजा22 दिसंबर 2010
निठारी कांड में गुनाहों की फेहरिस्त
सीबीआई ने सीरियल किलिंग के 16 मुकदमे पायल सीनियर, पिंकी सरकार, मधु, नंदा, अंजली, रचना लाल, दीपाली, निशा, आरती, बीना, हर्ष, पुष्पा, छोटी पायल, सतेन्द्र उर्फ मैक्स, ज्योति और रिंपा हल्दर में चार्जशीट दाखिल की थी, तीन मामलों में फाइनल रिपोर्ट लगाई ।
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