दिल्ली पुलिस के पास संसाधन व स्टाफ की कमी के कारण नौबत यहां तक आ गई कि राजधानी के तीन थानें शनिवार रात से बंद करने पड़ गए। पुलिस कमिश्नर बीके गुप्ता के प्रस्ताव पर उप राज्यपाल ने शुक्रवार को इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया। ये तीन थानें मध्य जिले के पहाड़गंज (ईस्ट), उत्तरी जिले के टाउन हॉल व पूर्वी जिला के मधुबन हैं। तीनों जिले के डीसीपी को शनिवार रात को पुलिस मुख्यालय से नोटिफिकेशन की प्रति भेज दी गई। इसके बाद थानों में एफआईआर दर्ज करनी बंद कर दी गई। बंद किए गए थानों के स्टाफ को अभी अन्य थानों में स्थानान्तरित नहीं किया गया है। दिल्ली में 184 थानें थे। इनमें जिले के थाने, स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच, आर्थिक अपराध शाखा, मेट्रो रेल व रेलवे के थाने शामिल हैं। तीन थानें बंद कर देने से इनकी संख्या 181 हो गई है। दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर वाईएस डडवाल ने राजधानी के बढ़ते अपराध पर काबू पाने के लिए कई थाने खोले थे। उनका मानना था कि थाने खोलने से इलाका छोटा होगा, जिससे अपराध पर काबू पाने में आसानी होगी। किंतु नए थाने खोलने में संसाधन व स्टाफ की कमी आड़े आई। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पुलिस कमीशन का मापदंड कहता है कि किसी थाने में एक माह में 60 मुकदमें व 75 शिकायतें एक सब इंस्पेक्टर के पद को क्रिएट करती हैं। इन तीनों थानों का इलाका बहुत छोटा था। लिहाजा इन थानों में जितनी शिकायतें आ रही थीं, उक्त मापदंड के अनुरूप थाने की आवश्यकता महसूस नहीं की गई। वह यह भी मान रहे हैं कि संशाधन व स्टाफ की कमी के कारण तीनों थाने बंद करने पड़ गए। ये थाने मंडावली, पहाड़गंज व कोतवाली से काटकर बनाए गए थे। तीनों थानों के क्षेत्र को पुन: उन्हीं में शामिल कर दिया गया है। पुलिस कमिश्नर बीके गुप्ता ने सलाना पत्रकार वार्ता में महसूस किया था कि दिल्ली की करीब दो करोड़ की जनसंख्या को देखते हुए पुलिस में स्टाफ की बहुत कमी है। इससे दिन की तरह रात में भी सड़कों पर पुलिस की तैनाती नहीं की जा सकती है। दिल्ली के सभी थानों में 15-20 फीसदी कर्मचारियों की कमी है। दिल्ली पुलिस के कर्मियों की संख्या 65,000 है। इस हिसाब से देखें तो 33 व्यक्ति पर एक पुलिसकर्मी पड़ता है, जो ब्रिटेन, अमेरिका आदि देशों की तुलना में खरा नहीं उतर रहा है। इन देशों में नौ लोगों पर एक पुलिसकर्मी पड़ता है। एक नए थाना खोलने के लिए कम से कम 150 कर्मी की जरूरत पड़ती है। इनमें से 60-70 कर्मी रिकार्ड, रीडर, मॉल खाना, सीपा, रिसेप्शन, कंप्यूटर आदि में फंसे रह जाते हैं। 40 फीसदी कर्मी कानून व्यवस्था को देखते हैं। पुलिस कमिश्नर ने यह सोचकर भी तीनों थानें को बंद करने का निर्णय लिया है ताकि यहां के स्टाफ को अन्य थानों में लगाया जा सके।
Wednesday, February 2, 2011
बढ़ रहा अपराध पर तीन थानों पर ताले
दिल्ली पुलिस के पास संसाधन व स्टाफ की कमी के कारण नौबत यहां तक आ गई कि राजधानी के तीन थानें शनिवार रात से बंद करने पड़ गए। पुलिस कमिश्नर बीके गुप्ता के प्रस्ताव पर उप राज्यपाल ने शुक्रवार को इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया। ये तीन थानें मध्य जिले के पहाड़गंज (ईस्ट), उत्तरी जिले के टाउन हॉल व पूर्वी जिला के मधुबन हैं। तीनों जिले के डीसीपी को शनिवार रात को पुलिस मुख्यालय से नोटिफिकेशन की प्रति भेज दी गई। इसके बाद थानों में एफआईआर दर्ज करनी बंद कर दी गई। बंद किए गए थानों के स्टाफ को अभी अन्य थानों में स्थानान्तरित नहीं किया गया है। दिल्ली में 184 थानें थे। इनमें जिले के थाने, स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच, आर्थिक अपराध शाखा, मेट्रो रेल व रेलवे के थाने शामिल हैं। तीन थानें बंद कर देने से इनकी संख्या 181 हो गई है। दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर वाईएस डडवाल ने राजधानी के बढ़ते अपराध पर काबू पाने के लिए कई थाने खोले थे। उनका मानना था कि थाने खोलने से इलाका छोटा होगा, जिससे अपराध पर काबू पाने में आसानी होगी। किंतु नए थाने खोलने में संसाधन व स्टाफ की कमी आड़े आई। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पुलिस कमीशन का मापदंड कहता है कि किसी थाने में एक माह में 60 मुकदमें व 75 शिकायतें एक सब इंस्पेक्टर के पद को क्रिएट करती हैं। इन तीनों थानों का इलाका बहुत छोटा था। लिहाजा इन थानों में जितनी शिकायतें आ रही थीं, उक्त मापदंड के अनुरूप थाने की आवश्यकता महसूस नहीं की गई। वह यह भी मान रहे हैं कि संशाधन व स्टाफ की कमी के कारण तीनों थाने बंद करने पड़ गए। ये थाने मंडावली, पहाड़गंज व कोतवाली से काटकर बनाए गए थे। तीनों थानों के क्षेत्र को पुन: उन्हीं में शामिल कर दिया गया है। पुलिस कमिश्नर बीके गुप्ता ने सलाना पत्रकार वार्ता में महसूस किया था कि दिल्ली की करीब दो करोड़ की जनसंख्या को देखते हुए पुलिस में स्टाफ की बहुत कमी है। इससे दिन की तरह रात में भी सड़कों पर पुलिस की तैनाती नहीं की जा सकती है। दिल्ली के सभी थानों में 15-20 फीसदी कर्मचारियों की कमी है। दिल्ली पुलिस के कर्मियों की संख्या 65,000 है। इस हिसाब से देखें तो 33 व्यक्ति पर एक पुलिसकर्मी पड़ता है, जो ब्रिटेन, अमेरिका आदि देशों की तुलना में खरा नहीं उतर रहा है। इन देशों में नौ लोगों पर एक पुलिसकर्मी पड़ता है। एक नए थाना खोलने के लिए कम से कम 150 कर्मी की जरूरत पड़ती है। इनमें से 60-70 कर्मी रिकार्ड, रीडर, मॉल खाना, सीपा, रिसेप्शन, कंप्यूटर आदि में फंसे रह जाते हैं। 40 फीसदी कर्मी कानून व्यवस्था को देखते हैं। पुलिस कमिश्नर ने यह सोचकर भी तीनों थानें को बंद करने का निर्णय लिया है ताकि यहां के स्टाफ को अन्य थानों में लगाया जा सके।
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