Friday, February 4, 2011

पंजाब पुलिस की वर्दी पर चौदह सौ दाग


बाहर से चमचम दिखती पंजाब पुलिस की वर्दी पर दागों की भरमार है। इस पर एक-दो नहीं, पूरे 1400 दाग हैं। दाग भी कोई ऐसे-वैसे नहीं, हत्या, रिश्वतखोरी, अपहरण तथा धोखाधड़ी जैसे संगीन मामलों के हैं। लेकिन आश्चर्य ! दागदार दामन के बावजूद ये पुलिसकर्मी अहम पदों पर विराजमान हैं। इस वक्त पंजाब पुलिस के कांस्टेबल से लेकर एडीजीपी रैंक तक के पुलिस कर्मचारियों में तीन आइजी, 13 एसपी, 29 डीएसपी, 28 इंस्पेक्टर, 51 सब इंस्पेक्टर, 160 एएसआई, 643 हेडकांस्टेबल तथा 624 कांस्टेबल विभिन्न आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। चौंकाने वाला तथ्य तो यह है कि इनमें एक डीएसपी सहित 30 पुलिस कर्मचारियों को विभिन्न अदालतें दोषी करार देकर सजा भी सुना चुकी हैं। लेकिन फिर भी नियमानुसार विभाग से डिसमिस नहीं किया गया। विभागीय आंकड़ों में 83 पुलिस अधिकारियों के मामलों में, जिनमें एक एसपी तथा चार डीएसपी भी शामिल हैं, को अनट्रेस दिखाकर एफआइआर ही खारिज कर दी गई। इसके अतिरिक्त 55 पुलिस अधिकारियों को चार्जशीट होने के बाद भी पदोन्नति का लाभ दिया गया। राज्य के कम से पांच सब डिवीजन में ऐसे डीएसपी तैनात हैं, जिनके खिलाफ रिश्वतखोरी व अन्य गबन के मामले लंबित हैं। फिर भी राजनेताओं व विभाग के आला अधिकारियों के नजर-ए-नूर होने के कारण ये अपने पदों पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं। हद तो तब हो गई जब पंजाब सरकार ने बकायदा पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में हलफनामा देकर इन दागी अफसरों को बचाने की कोशिश की। सरकार ने न्यायालय में बड़ी मासूमियत से कह दिया कि वह दागी अफसरों को पब्लिक डीलिंग वाले काम से हटाने के लिए तैयार है, लेकिन अगर मामले आतंकवाद के दौर से संबंधित हैं तो उनको नहीं हटाया जाएगा। सरकार की दागी अफसरों के मामले में नियत पर तब भी संदेह होता है, जबकि वह हलफनामे में कहती है कि सरकार दागी अफसरों के मामले में अपनी नीति में तब भी फेरबदल कर सकती है, यदि संबंधित मुलाजिम के खिलाफ निचली अदालत के फैसले पर ऊपरी अदालत रोक लगा चुकी है।


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