लखनऊ। राजधानी की जिला जेल में इन दिनों नशीले पदार्थ की बिक्री का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। इस सच का खुलासा पिछले दिनों तलाशी के दौरान पकड़े गए बंदीरक्षक के पास नशे के पाउडर की पकड़ी गई पुड़ियाओं की घटना से हुआ। जेल प्रशासन के अधिकारियों ने आरोपी बंदीरक्षक के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए मामला को रफादफा कर दिया। बंदियों का आरोप है कि एक समय में थम गया स्मैक की बिक्री का कारोबार एक बार फिर अफसरों की साठगांठ से शुरू हो गया है। इसे लेकर प्रतिमाह हजारों रुपए का वारा-न्यारा हो रहा है। इसके बावजूद विभाग के आला-अफसर इससे बेखबर है।
प्रदेश की शायद ही ऐसी कोई जेल हो जहां मादक द्रव्यों (स्मैक, गांजा, भांग, अफीम, चरस) की आपूर्ति न होती हो। इसको लेकर जेलों में आए दिन बवाल होने की बात भी जगजाहिर है। सूत्रों के मुताबिक शासन द्वारा घोषित प्रदेश की अतिसंवेदनशील लखनऊ जेल में करीब दो साल पहले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मनमाफिक सुविधा शुल्क देकर जेल के बंदी ही इसकी आपूर्ति धड़ल्ले से अन्य बंदियों को करते थे। सूत्रों का कहना है कि जेल में नशीले पदार्थो की आपूर्ति को रोकने एवं बंदियों को नशे की लत छुड़ाने के लिए अधिकारियों ने स्वयंसेवी संस्था की मदद से नशा उन्नमूलन कार्यक्रम को एक अभियान भी चलाया गया। जानकारों का कहना है कि अधिकारियों को यह प्रयास रंग लाया और कड़ी मशक्कत के बाद जेल के अंदर स्मैक की बिक्री काफी हद तक बंद हो गई। मादक द्रव्यों की आपूर्ति को रोकने के लिए जान जोखिम में डालकर अंकुश लगाने वाले इन अधिकारियों को जान से मारने की धमकी तक मिली। इसके बावजूद अधिकारियों ने अभियान के तहत जेल के अंदर नशीले पदार्थ की आपूर्ति पर अंकुश लगा दिया। यह सिलसिला चल ही रहा था कि शासन के निर्देश पर तत्कालीन जेल अधीक्षक का तबादला कर दिया गया। सूत्र बताते हैं कि अधीक्षक का तबादला होते ही सर्किल प्रभारी उपकारापाल से साठगांठ कर शातिर अपराधियों के माध्यम से स्मैक की बिक्री धड़ल्ले से शुरू करा दी है। इस बात का खुलासा बीते दिनों जेलर व बंदीरक्षक की मौजूदगी में ड्यूटी पर जा रहे बंदीरक्षक के पास तलाशी में 20 पुड़िया स्मैक बरामद हुई। जेल प्रशासन के अधिकारियों ने गेटबुक में नशीले पाउडर के स्थान पर अन्य वस्तु बरामद होने की बात कहते हुए मामले का रफादफा कर दिया। बताया गया है कि इस तलाशी अभियान के दौरान कुछ बंदियों ने जेल में दबंग बंदियों एवं बंदीरक्षकों के स्मैक के कारोबार में लिप्त होने की शिकायत की। बताया गया है कि प्रभारी उपकारापाल अपने चहते राइटर बंदियों के मार्फत स्मैक की बिक्री करके अपनी जेब भरने में जुटे हुए है। आलम यह है कि इस कारोबार से जुड़े कई बंदी इसकी वजह से बाहर तक नहीं जाना चाहते हैं। उधर इस बाबत जब जेलर से बातचीत करने का प्रयास किया गया तो काफी प्रयास केबाद भी उनसे सम्पर्क नहीं हो सका।
प्रदेश की शायद ही ऐसी कोई जेल हो जहां मादक द्रव्यों (स्मैक, गांजा, भांग, अफीम, चरस) की आपूर्ति न होती हो। इसको लेकर जेलों में आए दिन बवाल होने की बात भी जगजाहिर है। सूत्रों के मुताबिक शासन द्वारा घोषित प्रदेश की अतिसंवेदनशील लखनऊ जेल में करीब दो साल पहले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मनमाफिक सुविधा शुल्क देकर जेल के बंदी ही इसकी आपूर्ति धड़ल्ले से अन्य बंदियों को करते थे। सूत्रों का कहना है कि जेल में नशीले पदार्थो की आपूर्ति को रोकने एवं बंदियों को नशे की लत छुड़ाने के लिए अधिकारियों ने स्वयंसेवी संस्था की मदद से नशा उन्नमूलन कार्यक्रम को एक अभियान भी चलाया गया। जानकारों का कहना है कि अधिकारियों को यह प्रयास रंग लाया और कड़ी मशक्कत के बाद जेल के अंदर स्मैक की बिक्री काफी हद तक बंद हो गई। मादक द्रव्यों की आपूर्ति को रोकने के लिए जान जोखिम में डालकर अंकुश लगाने वाले इन अधिकारियों को जान से मारने की धमकी तक मिली। इसके बावजूद अधिकारियों ने अभियान के तहत जेल के अंदर नशीले पदार्थ की आपूर्ति पर अंकुश लगा दिया। यह सिलसिला चल ही रहा था कि शासन के निर्देश पर तत्कालीन जेल अधीक्षक का तबादला कर दिया गया। सूत्र बताते हैं कि अधीक्षक का तबादला होते ही सर्किल प्रभारी उपकारापाल से साठगांठ कर शातिर अपराधियों के माध्यम से स्मैक की बिक्री धड़ल्ले से शुरू करा दी है। इस बात का खुलासा बीते दिनों जेलर व बंदीरक्षक की मौजूदगी में ड्यूटी पर जा रहे बंदीरक्षक के पास तलाशी में 20 पुड़िया स्मैक बरामद हुई। जेल प्रशासन के अधिकारियों ने गेटबुक में नशीले पाउडर के स्थान पर अन्य वस्तु बरामद होने की बात कहते हुए मामले का रफादफा कर दिया। बताया गया है कि इस तलाशी अभियान के दौरान कुछ बंदियों ने जेल में दबंग बंदियों एवं बंदीरक्षकों के स्मैक के कारोबार में लिप्त होने की शिकायत की। बताया गया है कि प्रभारी उपकारापाल अपने चहते राइटर बंदियों के मार्फत स्मैक की बिक्री करके अपनी जेब भरने में जुटे हुए है। आलम यह है कि इस कारोबार से जुड़े कई बंदी इसकी वजह से बाहर तक नहीं जाना चाहते हैं। उधर इस बाबत जब जेलर से बातचीत करने का प्रयास किया गया तो काफी प्रयास केबाद भी उनसे सम्पर्क नहीं हो सका।
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