जम्मू-कश्मीर राज्य में हर वर्ष 33 फीसदी महिलाएं संगीन आपराधिक एवं आतंकी गतिविधियों में संलिप्त पाई जा रही हैं। महिलाओं पर हावी अपराध के इस जुनून से खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। जम्मू-कश्मीर में इस समय डेढ़ सौ ओवर ग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) महिलाएं आतंकियों के लिए काम कर रही हैं। इस बात का खुलासा आरटीआइ के तहत पूछे एक सवाल के जवाब में हुआ है। पुलिस के जेल विभाग में 1 नवंबर को दायर आरटीआइ के जवाब में डीआइजी जेल मुहम्मद सुल्तान लोन ने बताया कि संभाग में हर वर्ष सैकड़ों महिलाएं संगीन अपराधों में संलिप्त पाई जा रही हैं, लेकिन अपराध में जिस प्रकार से महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ रही है उस हिसाब से राज्य में पर्याप्त महिला थाने (वूमेन सेल) भी नहीं हैं। संभाग में महिला कैदियों के लिए फिलहाल कोई अलग जेल नहीं बनाई गई है। जम्मू संभाग में ही मात्र 3 महिला थाने (जम्मू, कठुआ व ऊधमपुर) बने हुए हैं। कानून के तहत महिला आरोपी को सामान्य थाने में न रखकर वूमेन सेल में रखा जाता है, लेकिन महिला थानों की कमी के कारण उन्हें जेल में रखना पड़ता है। मौजूदा समय में सेंट्रल कोट भलवाल, जिला जेल जम्मू, कठुआ, ऊधमपुर, पुंछ व राजौरी की जेलों में अलग बैरक बनाए गए हैं। जम्मू संभाग में 8 महिलाएं पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) जैसे गंभीर मामले में जेलों में बंद हैं। इस संभाग की 6 जेलों में 78 महिला कैदी बंद हैं। वर्ष 2009 में जम्मू संभाग में करीब 300 महिलाओं को विभिन्न आपराधिक व आतंकवाद फैलाने के मामलों में आरोपी बनाया गया था जबकि 2008 में 200 से कम महिलाओं के खिलाफ मामले दर्ज थे। मनोचिकित्सक जेके थापा का तर्क है कि आधुनिकता की दौड़ में लोगों का रुझान मीडिया से प्रभावित हो रहा है। आम महिलाएं अक्सर टीवी में चकाचौंध जीवन जीने वाले महिलाओं को देखकर उनकी तरह विख्यात होना चाहती हैं।
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