Wednesday, June 15, 2011

भारत में बढ़ते ही जा रहे छोटू


अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर बाल श्रम रोकने के लिए कानून तो बड़े-बड़े बनाए गए हैं, लेकिन बावजूद इसके देश की राजधानी सहित सभी कोनों में बाल मजदूरी बदस्तूर जारी है। दुनिया में बाल श्रम का मुख्य कारण गरीबी है। इसकी रोकथाम के लिए काम करने वाली दिल्ली की एक स्वयं सेवी संस्था बचपन बचाओ आंदोलन के संस्थापक कैलाश सत्यार्थी का कहना है कि घर से बाहर निकलते ही जो पहली चाय की दुकान होती है वहां आपको एक छोटू नजर आ जाता है। हम भी बड़े आराम से देश में बढ़ रहे बाल श्रम पर चर्चा करते हुए उससे चाय ले लेते हैं और पीने लगते हैं, लेकिन यह कभी नहीं सोचते कि अभी-अभी हमने भी इसी बाल श्रम को बढ़ावा दिया है। पूरी दुनिया से बाल श्रम को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम संगठन और 144 देशों ने बच्चों के अधिकारों के लिए एक प्रोटोकॉल बनाया है। इस प्रोटोकॉल का अनुमोदन करने वाले देश को अपनी सीमा में बच्चों की बिक्री, बाल वेश्यावृति और बच्चों की प्रोर्नोग्राफी पर पूर्ण रोक लगानी होती है। इन सभी को अपराध की श्रेणी में शामिल करना होता है, लेकिन भारत ने अभी तक इस प्रोटोकॉल का अनुमोदन नहीं किया है। हाल ही में पाकिस्तान ने भी बाल अधिकारों पर सम्मेलन के वैकल्पिक प्रोटोकॉल का अनुमोदन कर दिया है। ऐसा करने वाला वह दुनिया का 144वां देश बन गया है। दुनिया के 126 देशों में बाल श्रम के खिलाफ एक साथ हुए प्रदर्शन के बाद अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने पहली बार वर्ष 2002 में व‌र्ल्ड डे एगेंस्ट चाइल्ड लेबर की शुरुआत की। इस दिन की शुरुआत इन बच्चों की परेशानियों को लोगों के सामने लाने के लिए की गई थी.

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