Wednesday, June 29, 2011

हर दिन चार दुराचार से यूपी में हाहाकार


सूबे की सत्ता किसी महिला के हाथों में हो और वहां की स्ति्रयां अस्मत पर संकट महसूस करें तो कानून-व्यवस्था की हकीकत समझने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। एक दिन में औसतन चार स्ति्रयां अपनी अस्मत गंवाती हैं, यह उत्तर प्रदेश के सरकारी आंकड़े बताते हैं, लेकिन वास्तविकता इतर है। तमाम मामले पुलिस तक नहीं पहुंच पाते। लोकलाज और सामाजिक तिरस्कार इसके प्रमुख कारण हैं ही, बलात्कार की शिकार महिला के साथ पुलिसिया बर्ताव भी उनके पांव रोकते हैं। पिछले तीन माह में महिला उत्पीड़न की वारदातों पर नजर डाली जाय तो हकीकत खुद ब खुद बयां हो जाती है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 15 मार्च से 15 जून तक दुराचार के कुल 21 मामले दर्ज किए गए। इनमें पांच मामले दलित महिलाओं के भी हैं। अलीगढ़ में पिछले तीन महीने में दुष्कर्म की 15 घटनाएं हुई हैं। इनमें तीन महिलाएं दलित हैं। बाराबंकी में मार्च से 15 जून तक 10 महिलाओं के साथ दुराचार के अलावा 16 के साथ छेड़खानी की घटनाएं दर्ज की गई। फैजाबाद में नौ मामले दर्ज किए गए। इनमें से दुराचार पीडि़ता एक बालिका बिन ब्याही मां बन गई, जबकि एक अन्य के गर्भवती होने पर हत्या कर दी गई। सुल्तानपुर में तीन माह के भीतर दुराचार के आठ मामले पुलिस रिकार्ड में दर्ज किए गए, जिनमें तीन दलित बालिकाएं के मामले भी शामिल हैं। अंबेडकरनगर जिले में बलात्कार की पांच घटनाओं में मुकदमा दर्ज हुआ। लखीमपुर खीरी में भी तीन माह के भीतर पांच महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं हुई हैं। निघासन का बहुचर्चित सोनम हत्याकांड शामिल नहीं है। गोंडा में दुराचार के चार केस दर्ज हुए हैं। श्रावस्ती में मार्च से लेकर 15 जून तक बलात्कार की दो घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज की गई है। सीतापुर में तीन माह में दुराचार की एक घटना हुई। बलरामपुर में भी एक महिला के साथ दुराचार का मामला दर्ज किया गया। मेरठ में पिछले तीन माह में बलात्कार के बाद हत्या की तीन वारदातें हुई। बुलंदशहर, बागपत में एक-एक व वाराणसी में बलात्कार के दो मामले सामने आए। आजमगढ़ में दो मामले दर्ज हुए हैं, जिसमें एक में महिला को जलाकर मारने की कोशिश की भी की गई। बलिया में सुखपुरा थाना क्षेत्र के बिलारी गांव में 7 अप्रैल की शाम एक युवती के साथ तीन युवकों ने सामूहिक दुराचार किया और उसके बाद दरिंदों ने उसे कोठरी में बंद कर आग के हवाले कर दिया। गाजीपुर में तीन मामले दर्ज हुए। भदोही व मऊ में दो-दो मामले दर्ज हुए। जबकि सोनभद्र में तीन माह में दुष्कर्म के चार मामले दर्ज हुए हैं। इलाहाबाद में तीन माह में बलात्कार के आठ मामले हुए है। इनमें से दो की दुराचार के बाद हत्या कर दी गई। कौशाम्बी जिले में तीन माह के अंदर दुराचार की आधा दर्जन से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। प्रतापगढ़ जिले में बीते तीन माह के दौरान बलात्कार के तीन मामले दर्ज किए गए। मुजफ्फरनगर में एक महिला नेता के पुत्र ने आठ मई को घर में घुसकर किशोरी से बलात्कार का प्रयास किया और असफल होने पर उसे ब्लेड मार कर घायल कर दिया। राज्य के अन्य जिलों का भी यही हाल है।


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