Thursday, May 19, 2011

क्या-क्या हैं बच्चों के विरुद्ध अपराध


भारतीय दंड संहिता में बच्चों के विरुद्ध अपराध का कोई अलग वर्गीकरण नहीं है। सामान्यतया वे अपराध, जो बच्चों के विरुद्ध किए जाते हैं, या वे अपराध जिनमें बच्चे भुक्तभोगी होते हैं, उन्हें बच्चों के विरुद्ध अपराध माना जाता है। भारतीय दंड संहिता और विभिन्न निरोधात्मक एवं सुरक्षात्मक विशेष और स्थानीय कानूनोंमें विशेषकर ऐसे अपराधों का उल्लेख मिलता है, जिनमें बच्चे भुक्तभोगी होते हैं या इस रूप में जाने जाते हैं। सम्बंधित कानून और उसकी धाराओं में दी गई परिभाषाओं के अनुसार भिन्न-भिन्न अपराधों के लिए बच्चों की आयु में अंतर है, लेकिन किशोरावस्था न्याय कानून-2000 के अनुसार बच्चे की आयु 18 वर्ष से कम परिभाषित की गई है। इसके तहत उन्हीं अपराधों को बच्चों के विरुद्ध अपराध माना गया है जिनमें या तो बच्चों को अपराध का शिकार बनाया जाता है या प्रकारांतर में वे इसके भुक्तभोगी होते हैं। अपराध की श्रेणियां बहरहाल, विभिन्न अपराधों के उन मामलों को जिनमें बच्चे भुक्तभोगी अथवा प्रताड़ित होते हैं, मोटे तौर पर दो श्रेणी में रखा जा सकता है :- बच्चों के विरुद्ध होने वाले वे अपराध जिनमें भारतीय दंड संहिता के तहत सजा का प्रावधान है। बच्चों के विरुद्ध होने वाले वे अपराध जिनमें अपराधी विशेष और स्थानीय कानूनों (एसएलएल) के तहत दंडनीय होता है। उपयरुक्त दो श्रेणियों के अनुसार बच्चों के विरुद्ध अपराध से सम्बंधित विशेष धाराएं/कानून निम्नलिखित हैं :-
भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत दंडनीय, बच्चों के विरुद्ध किए जाने वाले अपराध :
क) हत्या (302 भादंवि)।
ख) भ्रूणहत्या के विरुद्ध धारा 315 और 316 भादंवि।
ग) शिशुहत्या (नवजात शिशु -0 से 1 वर्ष-के विरुद्ध अपराध) धारा 315 भादंवि।
घ) आत्महत्या के लिए उत्प्रेरण (बच्चों को आत्महत्या के लिए दूसरे व्यक्ति द्वारा उकसाना) धारा 305 भादंवि।
ङ) अरक्षित और परित्यक्त (परित्याग की मंशा से अभिभावकों या अन्य द्वारा बच्चों को आश्रय न देना या हमेशा के लिए छोड़ना) धारा 317 भादंवि।
च) अपहरण और फुसला या धमकाकर भगा ले जाना ए) बाहर भेजने (कबूतरबाजी)/तस्करी के लिए अपहरण (धारा 360 भादंवि) बी) विधिक संरक्षत्व से अपहरण (361 भादंवि) सी) फिरौती के लिए अपहरण (धारा 363-धारा 384 के साथ पठनीय) डी) ऊंट दौड़ आदि के लिए अपहरण (धारा 363 भादंवि) ई) भिक्षावृत्ति के लिए अपहरण(धारा 363-ए भादंवि) एफ) विवाह के लिए बाध्य करने उद्देश्य से अपहरण (धारा 366 भादंवि) जी) गुलामी के लिए अपहरण (धारा 367 भादंवि) एच) सम्बंधित व्यक्ति से चुराने के मकसद से 10 वर्ष तक के बच्चे का अपहरण (धारा 369 भादंवि)
छ) छोटी आयु की लड़की की मुख्तारी या दलाली(बलपूर्वक उकसाने या अवैध संभोग के लिए ललचाने के निमित्त(366-ए भादंवि)
ज) वेश्यावृत्ति के लिए लड़कियों की बिक्री (धारा 372 भादंवि)
झ) वेश्यावृत्ति के लिए लड़कियों को खरीदना (धारा 373 भादंवि)
ञ) बलात्कार (धारा 376 भादंवि)
ट) अप्राकृतिक अपराध (भादंवि 377) 1.विशेष और स्थानीय कानूनों के अंतर्गत दंडनीय, बच्चों के विरुद्ध किए जाने वाले अपराध : अ) अनैतिक अवैध क्रय-विक्रय निरोधक कानून 1956 (जहां छोटे बच्चों को वेश्यावृत्ति में अपमानित किया जाता है ) ब) बाल विवाह निरोध (संशोधन) कानून 1929 स) बाल श्रम (निवारण एवं विनियमन) कानून 1986



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