तो अब असम व पश्चिम बंगाल से राजधानी में बच्चे भी तस्करी होकर आने लगे हैं। यहां इन बच्चों को प्लेसमेंट एजेंसी या महंगी कीमत देने वाले लोगों को बेच दिया जाता है। क्राइम ब्रांच ने ऐसे ही एक रैकेट का खुलासा करते हुए सोलह वर्षीय किशोरी को बेचने की कोशिश कर रहे एक दलाल तथा प्लेसमेंट एजेंसी संचालिका को गिरफ्तार किया है। गिरोह के कब्जे से किशोरी समेत 11 से 15 आयु वर्ग के 8 बच्चे भी बरामद किए गए हैं। जांच में पाया गया है कि प्लेसमेंट एजेंसी अवैध रूप से संचालित की जा रही थी। गिरफ्तार महिला के पति की भी तलाश की जा रही है। ज्ञात हो कि अभी तक ड्रग्स या हथियार तस्करी के मामले सामने आते थे मगर बच्चों की तस्करी एक गंभीर मसला है। क्राइम ब्रांच उपायुक्त अशोक चांद के अनुसार सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति असम से लाई गई 16 वर्षीय किशोरी को बेचने की कोशिश कर रहा है। एक फर्जी ग्राहक की मदद से पुलिस ने इस्माइल नामक व्यक्ति से संपर्क किया। डेढ़ लाख रुपये में सौदा पक्का हुआ। अतिरिक्त उपायुक्त पीएस कुशवाह की देखरेख में टीम ने शकूरपुर जेजे कॉलोनी से सोलह वर्षीय किशोरी का बरामद कर इस्माइल को गिरफ्तार कर लिया। इस्माइल से पूछताछ के आधार पर शकूरपुर में ही चलने वाली बबिता इंटरप्राइजेज पर छापा मारा गया। अवैध रूप से चलने वाली इस प्लेसमेंट एजेंसी की संचालिका बबिता को गिरफ्तार किया गया तो खुलासा हुआ कि उसने दलालों की मार्फत खरीदे गए बच्चों को घरेलू नौकर के काम पर लगा रखा है। पुलिस ने शक्ति वाहनी एनजीओ की मदद से शहर के विभिन्न हिस्सों में काम कर रही 6 लड़कियां तथा 2 लड़कों को मुक्त कराया गया। उपायुक्त के अनुसार बरामद किये गए सभी बच्चे आसाम, पश्चिम बंगाल तथा भारत बांग्लादेश बार्डर इलाके के हैं। जांच में सामने आया है इस्माइल जैसे कई दलाल पश्चिम बंगाल, आसाम व भारत बांग्लादेश बार्डर पर सक्रिय हैं। गरीब परिजनों को बच्चे के उज्जवल भविष्य के लिए उनकी पढ़ाई लिखाई समेत हर महीने कुछ कमाई का लालच देकर यह दलाल बच्चे को दिल्ली ले आते थे। यहां लाकर बच्चों को बबिता इंटरप्राइजेज आदि प्लेसमेंट एजेंसियों को बेच दिया जाता था। एक नाबालिग की एवज में प्लेसमेंट एजेंसियां दलाल को 20 से 25 हजार रुपये अदा करती थीं।
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